संस्कृत व्याकरण : कारक
संस्कृत व्याकरण - कारक डॉ स्नेहलता व्यास सहायक आचार्य राजकीय महाविद्यालय सूरसागर, जोधपुर श्री महालक्ष्मी गर्ल्स कॉलेज, प्रताप नगर जोधपुर पाणिनीय परंपरा के अनुसार कारकों (kāraka) की समग्र और परीक्षा-उपयोगी व्याख्या पाणिनि ने कारक-सिद्धांत को अष्टाध्यायी में व्यवस्थित किया है और पारम्परिक व्याकरण में छः (ṣaṭ) कारक मान्य माने गए हैं। तालिका (छः मुख्य कारक) कारक (संस्कृत) अर्थ / भूमिका सामान्यतः प्रयुक्त विभक्ति (case) सरल उदाहरण (संस्कृत) अर्थ (हिन्दी) कर्तृ (kartā) क्रिया का कर्ता — जो कार्य करता/कराता है प्रथमा (Nom.) — परंतु कुछ प्रसंगों में तृतीया भी सिंहो पीलं खादति। सिंह पीला (कौन) खाता है → सिंह खाता है। कर्म (karman) क्रिया का कर्म/वस्तु — जिस पर क्रिया होती है द्वितिया (Acc.) सिंहो मांसं खादति। सिंह मांस खाता है। करण (karaṇa) साधन/उपकरण/माध्यम — जिससे क्रिया होती है तृतीया (Instr.) काकः हस्ते फलं गृह्णाति। कौआ हाथ से फल लेता है (हाथ-से = साधन)। सम्प्रदान (sampradāna) प्राप्...